भूमिका: मुख्य खरीदार जिसने विश्वास जीतकर 2 से 5 दिसंबर 2023 के बीच ₹21,97,000 का माल उधार लिया और ₹20,50,000 हड़प लिए। पैसे मांगने पर जान से मारने व खुदकुशी की धमकी दी।
भूमिका: अरुण मित्तल का भाई जो पूरी साज़िश में बराबर का साझीदार है इसने ED और GST की छापेमारी की झूठी कहानी को सच साबित करने की पूरी कोशिश की लेकिन बाद में साज़िश के तहत पैसे देने से साफ मुकर गया और शिकायतकर्ताओं को धमकी दी।
भूमिका: अरुण और करण मित्तल का पिता जिसने अपने बेटों के फ्रॉड को छुपाने और शिकायतकर्ताओं को गुमराह करने में मुख्य भूमिका निभाई। पंचायत में ₹10 लाख या घिमाना का प्लॉट देने का वादा किया और बाद में अपनी बात से पलट गया।
FIR Date:- September 13, 2024
लेन-देन की शुरुआत:- 02 दिसंबर 2023
02 दिसंबर 2023: अरुण मित्तल ने शिकायतकर्ताओं से ₹58,700 प्रति फोन के हिसाब से कुल 20 आईफोन 14 (128 GB) उधार पर लिए।
05 दिसंबर 2023: आरोपी ने उसी दर पर 10 और आईफोन 14 लिए, साथ ही मैकबुक का ऑर्डर लगाने के लिए ₹4,00,000 नकद (कार्ड स्वाइप के माध्यम से) उधार लिए। कुल लेनदेन ₹21,97,000 का हुआ, जिसे 10 दिन के भीतर चुकाने का वादा था।
दिसंबर 2023 (झूठे बहानों का दौर): 10 दिन बीतने पर अरुण मित्तल ने पैसे देने में आनाकानी शुरू कर दी। उसने झूठी कहानियां बनाईं कि माल दिल्ली में उसके ताऊ के लड़के विवेक को बेचा था, जहां GST और ED की छापेमारी (Red) हो गई है और वह बंदा फरार या गिरफ्तार है।
दिसंबर 2023 के अंत में (पहली पारिवारिक बैठक): आरोपियों के घर पर बैठक हुई, जिसमें अरुण के पिता नरेंदर मित्तल ने 15 दिन का समय मांगकर ₹1,25,000 देने का वादा किया, जो कभी पूरा नहीं हुआ। कुल मिलाकर आरोपियों ने ₹21,97,000 में से केवल ₹1,47,000 का भुगतान किया और ₹20,50,000 हड़प लिए
लिखित वित्तीय रिकॉर्ड व बिल: आरोपियों को दिए गए फोन के बिल, क्रेडिट कार्ड स्वाइपिंग और बैंक ट्रांसफर स्टेटमेंट जो ₹21,97,000 के लेन-देन की पुष्टि करते हैं।
30 अप्रैल 2024 की पंचायत वीडियो: आरोपियों के घर की रिकॉर्डिंग, जिसमें करण मित्तल खुद अपने हाथ से हिसाब मिला रहा है और नरेंदर मित्तल ₹10 लाख या प्लॉट देने की बात मान रहे हैं। (धारा 65B भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रमाण पत्र के साथ पुलिस को सौंप दी गई है)।
16 दिसंबर 2024 की दुकान की रिकॉर्डिंग (CCTV): हरफूल सैनी की दुकान की वीडियो, जिसमें मुख्य आरोपी अरुण मित्तल साफ शब्दों में अपनी गलती, बकाया राशि (चाहे वह ₹17 लाख कह रहा हो या ₹20 लाख) और किश्तों में पैसे लौटाने की बात कबूल कर रहा है।
अदालती आदेश (18.11.2025): माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जींद का आदेश जो स्पष्ट करता है कि आरोपी करण मित्तल जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसकी नीयत साफ नहीं है।
जांच अधिकारी (IO) द्वारा सरकारी रिकॉर्ड में विरोधाभास: ए.एस.आई. राजेश ने कोर्ट को गुमराह करने के लिए एक ही जांच फाइल के पेज 13 पर स्वीकार किया कि ₹20,50,000 की रिकवरी बकाया है, लेकिन पेज 17 पर लिख दिया कि "पूरी पेमेंट दी जा चुकी है"। यह सर्टिफाइड कॉपी द्वारा प्रमाणित खुला फर्जीवाड़ा है।
30 एक्टिव आईफोन को गायब बताना: शिकायतकर्ताओं ने साइबर सेल को सर्विलांस के लिए सभी 30 आईफोन्स के IMEI नंबर सौंपे थे, जो कि धरातल पर आज भी एक्टिव हैं और चल रहे हैं। इसके बावजूद आईओ राजेश ने अपनी रिपोर्ट के पेज 17 पर "NO DATA FOUND" लिखकर आरोपियों को सीधे रिकवरी से बचा लिया।
बिना लैब जांच के सबूतों को "Edited" बताना: शिकायतकर्ताओं द्वारा दी गई पुख्ता पंचायत वीडियो (30/04/2024), दुकान की सीसीटीवी फुटेज (16/12/2024) और 15 कॉल रिकॉर्डिंग्स को आईओ ने बिना किसी फॉरेंसिक लैब (FSL) जांच के अपनी मर्जी से रिपोर्ट में "एडिटेड" करार दे दिया, ताकि मुख्य सबूतों को कानूनी रूप से खत्म किया जा सके।
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों को समय देना: 18 नवंबर 2025 को जींद सेशन कोर्ट द्वारा सह-आरोपी करण मित्तल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद आईओ राजेश ने उसे गिरफ्तार नहीं किया। जब शिकायतकर्ताओं ने गिरफ्तारी की मांग की तो आईओ ने "मेरे पास और भी फाइलें हैं" कहकर टाल दिया, ताकि करण मित्तल को चंडीगढ़ हाई कोर्ट से स्टे लेने का पूरा समय मिल सके।
मुख्य प्रार्थी: दीपक सैनी व पार्टनर्स
पता: सफीदों गेट, जींद, हरियाणा
मोबाइल: +91-7404791200
ईमेल: (deepaksaini725@gmail.com)
मुकदमा: FIR संख्या 0428/2024
थाना: थाना शहर जींद, हरियाणा
वर्तमान जांच एजेंसी: सीआईए (CIA Staff), जींद
धाराएं: 406, 420, 506, 34 IPC
अस्वीकरण: इस वेबसाइट पर उपलब्ध सभी विवरण, समयरेखा (Timeline) और दस्तावेज़ पूरी तरह से माननीय न्यायालय, पुलिस रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की सत्याप्ति प्रतियों (Certified Copies) पर आधारित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहयोग सुनिश्चित करना है।
वर्तमान में तीनों आरोपियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया सीआईए (CIA) स्टाफ जींद के पास री-इन्वेस्टिगेशन और ठगी गई राशि ₹20,50,000 की रिकवरी हेतु सक्रिय है।