पुलिस प्रशासन की ढिलाई और गंभीर फर्जीवाड़ा

(Investigation Forgery & Loopholes)


  1. जांच अधिकारी (IO) द्वारा सरकारी रिकॉर्ड में विरोधाभास: ए.एस.आई. राजेश ने कोर्ट को गुमराह करने के लिए एक ही जांच फाइल के पेज 13 पर स्वीकार किया कि ₹20,50,000 की रिकवरी बकाया है, लेकिन पेज 17 पर लिख दिया कि "पूरी पेमेंट दी जा चुकी है"। यह सर्टिफाइड कॉपी द्वारा प्रमाणित खुला फर्जीवाड़ा है।
  2. 30 एक्टिव आईफोन को गायब बताना: शिकायतकर्ताओं ने साइबर सेल को सर्विलांस के लिए सभी 30 आईफोन्स के IMEI नंबर सौंपे थे, जो कि धरातल पर आज भी एक्टिव हैं और चल रहे हैं। इसके बावजूद आईओ राजेश ने अपनी रिपोर्ट के पेज 17 पर "NO DATA FOUND" लिखकर आरोपियों को सीधे रिकवरी से बचा लिया।
  3. बिना लैब जांच के सबूतों को "Edited" बताना: शिकायतकर्ताओं द्वारा दी गई पुख्ता पंचायत वीडियो (30/04/2024), दुकान की सीसीटीवी फुटेज (16/12/2024) और 15 कॉल रिकॉर्डिंग्स को आईओ ने बिना किसी फॉरेंसिक लैब (FSL) जांच के अपनी मर्जी से रिपोर्ट में "एडिटेड" करार दे दिया, ताकि मुख्य सबूतों को कानूनी रूप से खत्म किया जा सके।
  4. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों को समय देना: 18 नवंबर 2025 को जींद सेशन कोर्ट द्वारा सह-आरोपी करण मित्तल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद आईओ राजेश ने उसे गिरफ्तार नहीं किया। जब शिकायतकर्ताओं ने गिरफ्तारी की मांग की तो आईओ ने "मेरे पास और भी फाइलें हैं" कहकर टाल दिया, ताकि करण मित्तल को चंडीगढ़ हाई कोर्ट से स्टे लेने का पूरा समय मिल सके।
  5. अदालत में शिकायतकर्ता को कमजोर करने की साज़िश: कानूनी रूप से आरोपी की जमानत याचिका पर शिकायतकर्ता को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होता है। लेकिन आईओ राजेश ने सोची-समझी रणनीति के तहत हमेशा सुनवाई वाले दिन सुबह 10 बजे फोन पर सूचना दी (जैसे 10/11/2025 को किया), ताकि शिकायतकर्ता अपना वकील समय पर खड़ा न कर सके।
  6. दिनांक 26 मार्च 2025 (सरेआम जान से मारने की धमकी): सह-आरोपी नरेंदर मित्तल ने पालिका बाजार में नवीन जैन और नवनीत जैन को सरेआम गंदी गालियां दीं और धमकी दी कि "अगर तुम्हारी वजह से मुझे जेल जाना पड़ा तो तुम्हें जान से मार दूंगा, केस वापस ले लो"। इसकी लिखित शिकायत 27.03.2025 को एसएचओ थाना शहर जींद को दी गई, लेकिन पुलिस ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की।
  7. डीजीपी (DGP) पंचकूला को शिकायत: आईओ राजेश द्वारा सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी (IPC 166, 167, 218 के तहत अपराध) और आरोपियों से मिलीभगत के खिलाफ शिकायतकर्ताओं ने दिनांक 12-12-2025 और पुनः 16-01-2026 को पुलिस महानिदेशक (DGP), हरियाणा को पत्र लिखकर स्वतंत्र SIT जांच और आईओ को तुरंत निलंबित करने की मांग उठाई है।

(Quick Legal References)

जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मामले से संबंधित सभी प्रशासनिक एवं अदालती दस्तावेज यहां सूचीबद्ध किए गए हैं।

मुख्य प्रार्थी: दीपक सैनी व पार्टनर्स
पता: सफीदों गेट, जींद, हरियाणा
मोबाइल: +91-7404791200
ईमेल: (deepaksaini725@gmail.com)

मुकदमा: FIR संख्या 0428/2024
थाना: थाना शहर जींद, हरियाणा
वर्तमान जांच एजेंसी: सीआईए (CIA Staff), जींद
धाराएं: 406, 420, 506, 34 IPC

अस्वीकरण: इस वेबसाइट पर उपलब्ध सभी विवरण, समयरेखा (Timeline) और दस्तावेज़ पूरी तरह से माननीय न्यायालय, पुलिस रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की सत्याप्ति प्रतियों (Certified Copies) पर आधारित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहयोग सुनिश्चित करना है।

वर्तमान में तीनों आरोपियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया सीआईए (CIA) स्टाफ जींद के पास री-इन्वेस्टिगेशन और ठगी गई राशि ₹20,50,000 की रिकवरी हेतु सक्रिय है।

@ 2026 FIR 428 Case Dossier | सुरक्षित न्याय एवं सत्य की आजीविका हेतु।