(साजिश की शुरुआत)

Chronological Timeline

  1. 02 दिसंबर 2023 : अरुण मित्तल ने शिकायतकर्ताओं से ₹58,700 प्रति फोन के हिसाब से कुल 20 आईफोन 14 (128 GB) उधार पर लिए।
  2. 05 दिसंबर 2023: आरोपी ने उसी दर पर 10 और आईफोन 14 लिए, साथ ही मैकबुक का ऑर्डर लगाने के लिए ₹4,00,000 नकद (कार्ड स्वाइप के माध्यम से) उधार लिए। कुल लेनदेन ₹21,97,000 का हुआ, जिसे 10 दिन के भीतर चुकाने का वादा था।
  3. दिसंबर 2023 (झूठे बहानों का दौर): 10 दिन बीतने पर अरुण मित्तल ने पैसे देने में आनाकानी शुरू कर दी। उसने झूठी कहानियां बनाईं कि माल दिल्ली में उसके ताऊ के लड़के विवेक को बेचा था, जहां GST और ED की छापेमारी (Red) हो गई है और वह बंदा फरार या गिरफ्तार है।
  4. दिसंबर 2023 के अंत में (पहली पारिवारिक बैठक): आरोपियों के घर पर बैठक हुई, जिसमें अरुण के पिता नरेंदर मित्तल ने 15 दिन का समय मांगकर ₹1,25,000 देने का वादा किया, जो कभी पूरा नहीं हुआ। कुल मिलाकर आरोपियों ने ₹21,97,000 में से केवल ₹1,47,000 का भुगतान किया और ₹20,50,000 हड़प लिए।
  5. 30 अप्रैल 2024 (पारिवारिक पंचायत): मित्तल परिवार के घर पर एक पंचायत बुलाई गई। इसमें नरेंदर मित्तल और करण मित्तल ने खुद अपनी लिखित कॉपी से आपके हिसाब का मिलान किया। नरेंदर मित्तल ने सार्वजनिक रूप से माना कि वह 1 साल के भीतर (01/04/2025 तक) ₹10,000,000 दे देंगे या बदले में घिमाना स्थित अपना 165 गज़ का प्लॉट (कीमत ₹5-6 लाख) शिकायतकर्ताओं के नाम ट्रांसफर कर देंगे। अगली बैठक की तारीख 18 मई 2024 तय की गई।
  6. 20 मई 2024 (धमकी और मुकर जाना): शिकायतकर्ता जब दोबारा उनके घर गए, तो आरोपियों ने साज़िश के तहत उन्हें घर में घुसने तक नहीं दिया। पूरा दिन शिकायतकर्ता धूप में दरी बिछाकर बाहर बैठे रहे। शाम को आरोपियों ने साफ़ कह दिया कि वे कोई पैसा नहीं देंगे और उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
  7. 09 जुलाई 2024 (CM विंडो पर शिकायत): स्थानीय पुलिस द्वारा ठोस सुनवाई न किए जाने पर थक-हारकर दीपक सैनी ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Window) और एसपी ऑफिस जींद में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  8. 13 सितंबर 2024 (FIR दर्ज): उच्च अधिकारियों और सीएम विंडो के सख्त निर्देश के बाद थाना शहर जींद में जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ FIR No. 428 दर्ज की गई।
  9. 31 अक्टूबर 2024 (पुलिस की मिलीभगत / कैंसलेशन रिपोर्ट): जांच अधिकारी (IO) गीता देवी ने आरोपियों से मिलीभगत करके बिना पुख्ता जांच के इस आपराधिक मामले को "सिविल विवाद" का रूप देकर केस बंद करने की रिपोर्ट (Cancellation Report) तैयार कर दी।
  10. 05 नवंबर 2024 (SP का कड़ा रुख / री-इन्वेस्टिगेशन): दीपक सैनी ने तुरंत एसपी ऑफिस जींद जाकर सारे डिजिटल सबूत पेश किए। एसपी जींद ने पुलिस की कैंसलेशन रिपोर्ट को तुरंत खारिज कर दिया, लापरवाही बरतने वाली आईओ गीता देवी का ट्रांसफर किया और केस की दोबारा जांच (Re-investigation) के आदेश दिए।
  11. 16 दिसंबर 2024 (स्वीकारोक्ति / ऑडियो-वीडियो सबूत): अरुण मित्तल ने दीपक के ताऊ हरफूल सैनी की दुकान पर आकर दो बार (सुबह और शाम) लंबी बातचीत की, जिसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरे में कैद हो गई। इस बातचीत में अरुण मित्तल ने साफ़ माना कि पैसे बकाया हैं और उसने कोर्ट व जेल की कार्रवाई से बचने के लिए जनवरी में ₹1,00,000 और फिर हर महीने ₹30,000-₹35,000 की किश्तें देने का लिखित प्रस्ताव रखा। दीपक ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि बैंकों का CIBIL खराब हो रहा था और ब्याज बढ़ रहा था।
  12. 29 दिसंबर 2024 (साज़िश के तहत दोबारा मुकर जाना): अपनी गिरफ्तारी का वारंट जारी होने की भनक लगते ही आरोपियों ने एक गहरी साज़िश के तहत दोबारा पंचायत बुलाई, ताकि वे कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की फाइल लगाते समय इसे एक व्यापारिक समझौता दिखा सकें। लेकिन इस पंचायत में भी वे एक बार फिर पूरी तरह पैसे देने से मुकर गए और शिकायतकर्ताओं को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
  13. 16 जनवरी 2025 (जींद कोर्ट द्वारा जमानत खारिज): आरोपी अरुण मित्तल ने जींद कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका (BA 47/2025) लगाई थी। नए आईओ सतीश कुमार ने आरोपियों की मदद करने के लिए शिकायतकर्ता को केवल 1 घंटे पहले सूचना दी, फिर भी माननीय अदालत ने आरोपी की चालाकी को भांपते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
  14. साल 2025 (उच्च न्यायालय से राहत और असहयोग): जींद कोर्ट से झटका मिलने के बाद आरोपी अरुण मित्तल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत (CRM-M-3207-2025) लेने में सफल रहा। हालांकि, पुलिस की आधिकारिक स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जमानत मिलने के बाद भी आरोपियों ने तफ्तीश में कोई सहयोग नहीं किया और पुलिस को घुमाते रहे।
  15. 17 जुलाई 2025: सह-आरोपी नरेंदर कुमार मित्तल को एडिशनल सेशंस जज, जींद की अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई।
  16. 18 नवंबर 2025 (करण मित्तल की जमानत खारिज): एडिशनल सेशंस जज (Ms. Shifa) की अदालत ने आरोपी करण मित्तल की अग्रिम जमानत याचिका (Bail Application No. 141 of 2025) को खारिज कर दिया, क्योंकि उसने जांच अधिकारी के सामने पेश होने के बावजूद तफ्तीश में कोई सहयोग नहीं किया था।
  17. 26 मार्च 2025 / आगामी चरण (केस CIA में ट्रांसफर):  स्थानीय पुलिस की संदिग्ध ढिलाई और आरोपियों के साथ मिलीभगत को देखते हुए एसपी जींद ने केस सीआईए (CIA Staff, Jind) को ट्रांसफर कर दिया, जहाँ एएसआई राजेश कुमार को नया आईओ बनाया गया। वर्तमान में तीनों आरोपी कानून की कमियों का फायदा उठाकर बाहर हैं और शिकायतकर्ताओं को केस वापस लेने के लिए डरा-धमका रहे हैं।

(Quick Legal References)

जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मामले से संबंधित सभी प्रशासनिक एवं अदालती दस्तावेज यहां सूचीबद्ध किए गए हैं।

मुख्य प्रार्थी: दीपक सैनी व पार्टनर्स
पता: सफीदों गेट, जींद, हरियाणा
मोबाइल: +91-7404791200
ईमेल: (deepaksaini725@gmail.com)

मुकदमा: FIR संख्या 0428/2024
थाना: थाना शहर जींद, हरियाणा
वर्तमान जांच एजेंसी: सीआईए (CIA Staff), जींद
धाराएं: 406, 420, 506, 34 IPC

अस्वीकरण: इस वेबसाइट पर उपलब्ध सभी विवरण, समयरेखा (Timeline) और दस्तावेज़ पूरी तरह से माननीय न्यायालय, पुलिस रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की सत्याप्ति प्रतियों (Certified Copies) पर आधारित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहयोग सुनिश्चित करना है।

वर्तमान में तीनों आरोपियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया सीआईए (CIA) स्टाफ जींद के पास री-इन्वेस्टिगेशन और ठगी गई राशि ₹20,50,000 की रिकवरी हेतु सक्रिय है।

@ 2026 FIR 428 Case Dossier | सुरक्षित न्याय एवं सत्य की आजीविका हेतु।